दिखा के आइना नाहक बवाल कौन करे ,
ज़मीर ज़िःबह किया अब सवाल कौन करे ?
मैं अपने आप से लड़ता हूँ ,हार जाता हूँ ,
इस हार जीत पे जश्नोमलाल कौन करे ?
अपनी खुद्दारी ही दुश्मन है ,भला क्या कीजे ,
वो मान लेगा मगर अर्ज़े हाल कौन करे ?
अपनी परछाई में दिखती हैं दरारें मुझको ,
अक्स बेजोड़ हो ऐसा कमाल कौन करे ?
डॉ .ब्रजेश शर्मा

Comments

Anonymous said…
दिखा के आइना नाहक बवाल कौन करे ,
ज़मीर ज़िःबह किया अब सवाल कौन करे ?

bawaal kaa aap jaane... yeh ghazal wabaal se kam nahiin, aur ham tamaashbeen hain saahab... bhaut khoob!
Uncle, its too good. i really did'nt know that you are such a good poet. Not finding words for appreciation. But a request is there...please send me your writings in bulk. i am too eager to read all.

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